रविवार, 17 अप्रैल 2011

हरी आँख का समंदर

यह स्केच १९८८ में बनाया था मैंने और इसका शीर्षक रक्खा था "हरी आँख का समंदर"...
मुझे आज भी ये आँखें बरबस अपनी ओर खींचती हैं ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. kabhi mere sawalo ka jawab deti,
    kabhi mujhse sawal karti najar aati ye tumhari aakhe hai.... !!

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  2. बहुत कुछ सम्प्प्रेषित कर गयी यह रचना .....!

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  3. Aapki har kalakriti gahre arth ko samete rahti hai...sahi mayne me aap ek chitrakar hi hain..bahut sundar..

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  4. any thing sketched can not be art it seems kachara o
    nly.learn the art seriously . learn how to sketch your feellings.

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