रविवार, 3 अप्रैल 2011

एक दूजे के लिए

वर्ष १९८८ में बनाया गया यह स्केच आज भी मुखर है....क्या आप इसकी आवाज़ सुन पा रहे?

7 टिप्‍पणियां:

  1. हाँ ! सुन पा रही हूँ !

    पीछा करते -करते यहाँ तक आयी यहाँ और अक्सर आउंगी यहाँ अब तो ! आप समझ गए होंगे कितना प्यार है मुझे रंगों से !

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  2. पहले तो आप मेरे ब्लॉग पर आये है इसका शुक्रिया !
    आपके स्केच सभी मैंने देखे है बहुत सुंदर लगे पर
    यह मेरे लिए नया है ! क्या आप ही मुझे बता सकेंगे ये
    तस्वीर क्या बोल रही है !

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  3. आपके स्केचेज़ और चित्र देखे. बहुत अच्छे लगे.

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  4. यह तो बहुत सुन्दर है..अच्छा लगा यहाँ आकर.
    ____________________
    'पाखी की दुनिया' में भी आपका स्वागत है.

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  5. Suman ji,yeh tasveer san 1988 ki bani hai...vivahparant yah vada kiye huye ki ek duje
    ke liye hain aur rahenge...iss sketch mein 2 chehre husband wife ke prominently ek duje ke concept ko jeete huye hain ,...anya rishton ki bhumika background me chhipe kuchh chehron ke madhyam se vyakt ki gayee hai.

    meri kavitaon ki bhi samalochna kar sakti hain aap...kuchh kahi kuchh ankahi pe jakar.

    dhanyavaad

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  6. dekhiye aapki is tasvir ne mujhe phir se apke blog par bula hi liya hai....bhale hi mujhe inki samajh nahi hai, inme jo mystery hai mujhe jarur apni or khincti hai....badhiya hai...

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  7. aapki tasviren keval bol hi nahi rahi hai...balki manas-patal par ankit v ho rahi hai..nissandeh aap achchhe chitrakar hain...behad pasand aaya sketch.

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