बुधवार, 14 मार्च 2012

मन की आँखें

इस पेंटिंग में मैंने मन को एक आँख देने की कोशिश की है....

2 टिप्‍पणियां:

  1. man ki ek aankh hi kafi hai....!
    ek aankh hai to ye haal hai man ka....!!
    do ankhon se bhatkaav jyada ho jayega man ka....!!

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  2. वाह ! कमाल की कल्पना है
    …आपके ब्लॉग के सभी चित्र अच्छे हैं Vijuy Ronjan Ji !

    आपको
    हार्दिक बधाई !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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